World Ozone Day





पंडित एस एन शुक्ल विश्वविद्यालय के समाज कार्य (MSW) विभाग के द्वारा 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस पर परिचर्चा एवम विभागाध्यक्ष नीलिमा खरे ,सहायक प्रध्यापक नितिन गर्ग अतिथि विद्वान  एवम एम .एस. डब्लू के छात्रों द्वारा  पीपल का वृक्ष लगाया गया । एवम छात्रों ने संकल्प लिया अपने क्षेत्र में 20 लोगो इससे संबंधित जानकारी प्रदान की जाएगी । प्रोफेसर नीलिमा खरे जी द्वारा बताया गया कि ओजोन परत  के  संरक्षण हेतु जो दिवस मनाया जाता है उसका  और यह विषय विश्व कल्याण से संबंधित है ।अतिथि विद्वान  नितिंन गर्ग जी द्वारा बताया गया कि किस प्रकार 

ओजोन परत सूर्य से आने वाली अल्ट्रावायलेट किरणों को रोकने में मदद करती है. अल्ट्रावायलेट किरणों के सीधे संपर्क में आने से स्किन कैंसर जैसी बीमारी होने का खतरा रहता है. मोतियाबिंद और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं.

1995 में मनाया गया था पहला वर्ल्ड ओजोन डे ।

साल 2023 में विश्व ओजोन दिवस की थीम 'मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल: फिक्सिंग द ओजोन लेयर एंड रिड्यूसिंग दे क्लाइमेंट चेंज' यानी 'मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल: ओजोन परत की मरम्मत और जलवायु परिवर्तन को कम करना' रखी गई है.

मास्टर ऑफ सोशल वर्क के छात्रों  ने भी कुछ बाते मंच से साझा की जैसे 

शिवम रजक द्वारा बताया गया कि 

हर साल 16 सितंबर को पूरी दुनिया में विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है. धरती के चारों ओर स्थित ओजोन परत के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है. जितना जरूरी मनुष्य के  शरीर के लिए ऑक्सीजन है, उतना ही आवश्यक  ओजोन परत  इस धरती माता के लिए है ।

छात्रा संध्या तिवारी द्वारा 

ओजोन लेयर के बारे में जानकारी दी गई कि ओजोन लेयर धरती के वायुमंडल की एक परत है जो सूरज से सीधी आती किरणों को रोकती है. ओजोन परत सूरज की खतरनाक अल्ट्रावायलेट किरणों को छानकर धरती पर भेजता है. ओजोन लेयर धरती और उस पर रहने वाले सभी जीवों की रक्षा हानिकारक किरणों से करती है.ओजोन लेयर ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं (O3) से मिलकर बनने वाली गैस है. 

तथा दिव्य तिवारी के द्वारा विशेषता और पहचान के बारे में बताया गया की

ओजोन एक हल्का नीला, हानिकारक, बदबूदार और अत्यधिक प्रतिक्रियाशील गैस है, जो समताप मंडल में ऊपर मौजूद है. 

रश्मी सिंह द्वारा वायु मंडल में अजोने परत की स्तिथि के बारे बताया गया की ओजोन परत की 

मोटाई हर जगह एक सी नहीं

ओजोन परत एक सुरक्षात्मक परत है जो पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से बचाती है. UV किरणें त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं.  ओजोन परत वायुमंडल में समताप मंडल के निचले हिस्से में पृथ्वी की सतह के 10 से 22 मील की ऊंचाई पर होती है. इसकी मोटाई हर जगह एक सी नहीं है. जहां यह भूमध्य रेखा के ऊपर सबसे मोटी है तो वहीं ध्रुवों पर यह सबसे पतली होती है. 

वही उपस्तिथ रेशमी नामदेव ने बताया कि लोग  ओजोन परत को नुकसान पहुच रहा है 

हम घर पर एसी और फ्रिज का इस्तेमाल करते हैं और इनसे जो गैस निकलती है वो ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती है. वहीं, प्राकृतिक कारकों में सौर क्रिया,  पृथ्वी के रचनात्मक प्लेट किनारों से निकलने वाली गैस, नाइट्रस ऑक्साइड, प्राकृतिक क्लोरीन और केंद्रीय ज्वालामुखी उद्गार से निकलने वाली गैसों से भी ओजोन परत को नुकसान पहुंचता है. पेड़-पौधों को काटना भी ओजोन लेयर के लिए हानिकारक है।


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