समाज कार्य में संगीत का महत्व
पंडित शंभनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय शहडोल संगीत विभाग के अतिथि व्याख्याता डॉ संजीव द्विवेदी जी छात्रों को मानव जीवन में संगीत का अत्यंत गहरा प्रभाव है। यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि भावनाओं को व्यक्त करने, तनाव को कम करने और सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाने का एक सशक्त माध्यम है। समाज कार्य (Social Work) का उद्देश्य व्यक्तियों, समूहों और समुदायों की समस्याओं का समाधान करना, उन्हें प्रेरित करना और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। इस प्रक्रिया में संगीत का प्रयोग एक प्रभावी साधन के रूप में किया जा सकता है, क्योंकि संगीत व्यक्ति के मन और मस्तिष्क पर सीधा प्रभाव डालता है।
भावनात्मक अभिव्यक्ति का साधन
संगीत व्यक्ति की आंतरिक भावनाओं को अभिव्यक्त करने का एक सहज माध्यम है। समाज कार्य में जब क्लाइंट अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने में कठिनाई महसूस करता है, तब संगीत या गीतों के माध्यम से वह अपनी पीड़ा, खुशी या संघर्ष को आसानी से साझा कर सकता है। यह न केवल क्लाइंट की भावनात्मक शुद्धि (Catharsis) करता है, बल्कि समाज कार्यकर्ता को भी उसकी समस्याओं को गहराई से समझने में मदद करता है।
तनाव मुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और मानसिक दबाव आम हो गया है। समाज कार्य के क्षेत्र में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं, जैसे – अवसाद, चिंता और नशे की लत, पर काम किया जाता है। संगीत चिकित्सा (Music Therapy) इन समस्याओं के समाधान में अत्यंत कारगर सिद्ध होती है। शांत और मधुर संगीत सुनने से मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे हार्मोन का स्राव होता है, जो व्यक्ति को तनाव से राहत देता है।
सामुदायिक एकता और सामाजिक बंधन
संगीत लोगों को जोड़ने का कार्य करता है। समाज कार्य में सामुदायिक संगठन (Community Organization) की प्रक्रिया के दौरान समूह गीत, भजन, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिससे समुदाय के सदस्य एक-दूसरे के करीब आते हैं। यह सामाजिक एकता और सामूहिकता को प्रोत्साहित करता है, जो समाज विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
शिक्षा और जागरूकता का साधन
समाज कार्य का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य शिक्षा और सामाजिक जागरूकता फैलाना भी है। गीत, लोकगीत, नाटक और संगीत कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक बुराइयों जैसे – बाल विवाह, दहेज प्रथा, नशा, बाल श्रम आदि के खिलाफ संदेश दिया जा सकता है। सरल भाषा और संगीत से जुड़ा संदेश लोगों तक जल्दी पहुँचता है और वे उसे लंबे समय तक याद रखते हैं। जैसे देखे तो स्वच्छ भारत अभियान और बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों में लोकगीतों और संगीत के माध्यम से जनता को जागरूक किया गया।
विशेष जरूरतमंद बच्चों के लिए उपयोग
विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (जैसे – ऑटिज़्म, लर्निंग डिसएबिलिटी या दृष्टिहीन बच्चे) संगीत से तेजी से जुड़ते हैं। समाज कार्यकर्ता संगीत का उपयोग उनके व्यवहार सुधारने, सीखने की क्षमता बढ़ाने और आत्मविश्वास विकसित करने के लिए करते हैं। संगीत इन बच्चों में संचार कौशल को बढ़ाता है और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ता है।पुनर्वास और नशा मुक्ति में भूमिका
नशा मुक्ति केंद्रों और पुनर्वास कार्यक्रमों में संगीत चिकित्सा का उपयोग किया जाता है। नशे से ग्रस्त लोग अक्सर उदासी और मानसिक अस्थिरता का शिकार रहते हैं। ऐसे में संगीत उन्हें मानसिक शांति और आत्मबल प्रदान करता है। सामूहिक रूप से गाना गाना या वाद्ययंत्र बजाना उन्हें सकारात्मक गतिविधियों की ओर मोड़ता है।
सांस्कृतिक पहचान और आत्मसम्मान
समाज कार्य में संस्कृति का बहुत महत्व है। संगीत किसी भी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक होता है। जब समाज कार्यकर्ता किसी समुदाय के साथ उनके पारंपरिक गीतों और संगीत का उपयोग करके कार्य करता है, तो वह लोगों के आत्मसम्मान को बढ़ाता है। इससे वे अपने समाज और परंपराओं पर गर्व महसूस करते हैं और विकासात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं।
चिकित्सकीय और परामर्श सेवाओं में सहायक
परामर्श (Counseling) की प्रक्रिया में कई बार क्लाइंट अपने अनुभव साझा करने से हिचकिचाता है। संगीत का प्रयोग उसकी झिझक को दूर करता है और उसे सहज बनाता है। अस्पतालों और मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में संगीत का उपयोग दर्द कम करने और रोगियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए किया जाता है। समाज कार्यकर्ता इस तकनीक का उपयोग कर क्लाइंट को अधिक आरामदायक स्थिति में ला सकते हैं।
वृद्धजनों और अकेलेपन से जूझते लोगों के लिए वृद्धाश्रमों में या अकेलेपन से जूझते वृद्ध लोगों के लिए संगीत जीवन में नई ऊर्जा लाता है। पुराने गीत उनकी यादों को ताज़ा कर उन्हें मानसिक शांति प्रदान करते हैं। समाज कार्यकर्ता संगीत के माध्यम से उनके लिए समूह गतिविधियाँ कराते हैं, जिससे वृद्धजनों का अकेलापन कम होता है और वे मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करते हैं।
समाज कार्य में नवाचार और संगीत
आज समाज कार्य में नवाचार (Innovation) की आवश्यकता है। संगीत एक ऐसा साधन है जिसे न केवल व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर बल्कि तकनीकी माध्यमों से भी प्रयोग किया जा सकता है। मोबाइल, रेडियो, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से संगीत आधारित संदेशों को बड़े पैमाने पर फैलाया जा सकता है।
संगीत विभाग के द्वारा समाज कार्य एवं समाज शास्त्र विभाग के संगीत के महत्व पर चर्चा एवं संगीत प्रस्तुत किया गया जिसमें संगीत विभाग के डॉ संजीव द्विवेदी,साहू सर एवं दुबे सर ने कार्यक्रम को संचालित किया तथा उस दौरान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नीलिमा खरे , परिसर प्रभारी डॉ गीता सराफ विजिटिंग फैकल्टी समाज कार्य श्री नितिन गर्ग,श्री अर्पित दुबे । समाज शास्त्र से श्री राकेश मिश्रा, डॉ सिद्धार्थ, डॉ जितेंद्र,कल्याणी उपाध्याय , वाणिज्य विभाग से सहायक प्राध्यापक डॉ रजनी एवं समाज कार्य के विद्यार्थी पूजा सिंह,आयुष मिश्रा, अंतरा शुक्ला, पिंकी कुशवाहा,अनामिका शर्मा, मुस्कान शुक्ल, उमा प्रजापति, राम बाबू पटेल,श्वेता तिवारी ने अपनी सहभागिता दी एवं समाज शास्त्र एवं समाज कार्य से अन्य विद्यार्थी भी कार्यक्रम में सहभागी रहे ।
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