विश्व पर्यावरण दिवस


आज दिनांक 06/06/25 पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय के समाज कार्य के छात्रों ने विश्व पर्यावरण दिवस के अंतर्गत भूमि संरक्षण कार्यालय शहडोल का शैक्षणिक भ्रमण किया गया । छात्रों के समूह ने कार्यालय में पदस्थ अधिकारी श्री अनुराग पटेल जी ने विभाग द्वारा किए जा रहे कार्य, कार्यालय की आधिकारिक संरचना, एवं संबंधित विभागों की विस्तृत जानकारी छात्रों को प्रदान करने का प्रयास किया गया । पटेल जी के द्वारा जानकारियों में प्रमुख बाते बताई गई जैसे भूमि संरक्षण कार्य का मुख्य संबंध भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत है। भूमि संरक्षण कार्य की विभागीय संरचना भारत में राज्य सरकारों के कृषि विभाग, भूमि विकास विभाग या जल संसाधन विभाग के अधीन होती है। यह संरचना ग्राम स्तर से लेकर राज्य स्तर तक फैली होती है और विभिन्न अधिकारियों व तकनीकी कर्मचारियों के सहयोग से कार्य करती है। भूमि संरक्षण कार्य की विभागीय संरचन राज्य स्तर निदेशक राज्य की भूमि संरक्षण नीति, योजनाओं और बजट का निर्धारण, सभी जिलों की निगरानी और मूल्यांकन है। संयुक्त निदेशक योजनाओं का तकनीकी मार्गदर्शन, अधिकारियों का प्रशिक्षण और रिपोर्टिंग भी है। वरिष्ठ भू-संरक्षण अभियंता इंजीनियरिंग कार्यों जैसे चेक डैम, टेरेसिंग, जलग्रहण क्षेत्र विकास की तकनीकी स्वीकृति । जिला स्तर पर जिला भूमि संरक्षण अधिकारी जिले की सभी योजनाओं का क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय, किसानों से संपर्क। सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी तथा सहायक अभियंता क्षेत्रीय योजनाओं का निरीक्षण, निगरानी, तकनीकी रिपोर्टिंग। कार्यपालन यंत्री निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करना। विकासखंड अथवा तहसील स्तर खंड भूमि संरक्षण अधिकारी ग्राम पंचायतों में योजनाओं का संचालन और किसान संपर्क। कृषि पर्यवेक्षक अथवा मृदा सहायक किसानों को मृदा सुधार तकनीकों की जानकारी देना, फील्ड पर निगरानी रखना। भू-संरक्षण सुपरवाइजर अथवा तकनीकी सहायक चेक डैम, जल निकासी, मिट्टी उपचार के कार्यों का संचालन। ग्राम या फील्ड स्तर पर ग्राम सचिव अथवा रोजगार सहायक मनरेगा संबंध भूमि संरक्षण योजनाओं में पंचायत भागीदारी सुनिश्चित करना। कृषक मित्र अथवा स्वयंसेवक किसानों से संवाद, योजना जानकारी और प्रेरणा देना। मजदूर अथवा तकनीकी कार्मिक चेक डैम निर्माण, नाला खुदाई, वृक्षारोपण, आदि भौतिक कार्य। विभाग कई अन्य विभागों जैसे कृषि, जल संसाधन, मनरेगा, वन विभाग, और नाबार्ड के साथ मिलकर काम करता है। मुख्यतः मृदा संरक्षण, जल संग्रहण, बंजर भूमि सुधार, वृक्षारोपण, और कृषकों का प्रशिक्षण शामिल होते हैं। 
माइक्रो लेवल पर कृषि विकाश अधिकारी द्वारा गांवों का दौरा और मिट्टी परीक्षण अभियान चलाना, किसानों को उर्वरक और कीटनाशकों की जानकारी देना,कृषि योजना फॉर्म भरवाना और सहायता उपलब्ध कराना ,फसल प्रक्षेत्र का निरीक्षण और कीट नियंत्रण उपाय , किसान प्रशिक्षण शिविर और मशीनरी प्रदर्श l

भूमि संरक्षण कार्यालय किसानों के हित में कई प्रकार से कार्य करता है, जिससे उनकी खेती की उत्पादकता बढ़ती है, भूमि की उर्वरता बनी रहती है और प्राकृतिक आपदाओं से भी सुरक्षा मिलती है। यह विभाग प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, खेती योग्य भूमि की रक्षा, और स्थायी कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है।
 भूमि संरक्षण कार्यालय किसानों के हित में कार्य करता है। जैसे मृदा क्षरण की रोकथाम
वर्षा, हवा या ढलानों के कारण उपजाऊ मिट्टी बह जाती है, जिसे रोकने के लिए: कंटूर प्लाउइंग ,टेरेस फार्मिंग ,ग्रास वाटर वे जैसे उपाय कराए जाते हैं।
जल संरक्षण और सिंचाई सुविधा में सुधार सूखे क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए नाला बंदी तालाब निर्माण, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज कुंए बनाए जाते हैं। इससे किसानों को सिंचाई के लिए जल उपलब्ध होता है। बंजर और अनुपजाऊ भूमि का सुधार वैज्ञानिक तकनीकों से
भूमि सुधार कार्यक्रम, जैविक खाद का उपयोग, भूमि समतलीकरण, हरित खाद डालने की सुविधा दी जाती है।
मृदा परीक्षण एवं उर्वरता सलाह
मिट्टी की जांच कराकर किसानों को बताया जाता है उनकी भूमि में कौन-कौन से पोषक तत्त्व की कमी है। कौन-सी फसल उपयुक्त है और कितनी मात्रा में खाद डालनी चाहिए।
फसल चक्र और स्थायी कृषि प्रणाली का प्रचार किसानों को सिखाया जाता है फसल चक्र अपनाना। जैविक खेती को अपनाना। मल्चिंग, वर्मी कम्पोस्ट, इंटरक्रॉपिंग जैसी तकनीकें।
प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम किसानों को विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाता है भूमि संरक्षण के उपाय,सिंचाई जल प्रबंधन, जैविक खेती, कम लागत वाली तकनीकें। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना भूमि संरक्षण कार्यालय किसानों को जोड़ता है तकनीकी मार्गदर्शन एवं उपकरणों की सहायता किसानों को भूमि समतलीकरण मशीनें, ट्रेंच खुदाई उपकरण, सिंचाई के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम उपलब्ध कराए जाते हैं।
 किसानों को प्रमुख रूप से जो लाभ होता भूमि की गुणवत्ता में सुधार मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है l सिंचाई की सुविधा कम पानी में बेहतर फसल संभव फसल उत्पादन में वृद्धि वैज्ञानिक उपायों से उपज बढ़ती हैl लागत में कमी प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग
प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा मृदा क्षरण, सूखा आदि से राहत l जानकारी के दौरान पटेल जी ने छात्रों को उद्यमिता से जुड़ने हेतु सुझाव भी दिया जैसे खाद्य प्रसंस्करण उदाहरण के रूप में शहडोल जिला वर्तमान में हल्दी जिला घोषित है । उस दौरान विजिटिंग फैकल्टी नितिन गर्ग एवं नगर के प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट निखिल जी मास्टर ऑफ सोशल वर्क के छात्र आयुष मिश्रा,पुष्पलता सिंह,आंचल शर्मा,आकांक्षा गुप्ता,अंजली गुप्ता तथा समन्वय विजिटिंग फैकल्टी अर्पित दुबे जी द्वारा किया गया ।

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