शैक्षणिक भ्रमण


आज दिनांक 13.3.2026 को विभागाध्य समाज कार्य एवं समाजशास्त्र विभाग  प्रोफेसर नीलिमा खरे जी के मार्गदर्शन में पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय के मास्टर ऑफ सोशल के छात्रों ने जिला मलेरिया विभाग का शैक्षणिक भ्रमण किया तथा श्री हनुमान प्रसाद जिला मलेरिया ऑफिसर द्वारा विभाग के गतिविधियों के बारे में बहुत ही विस्तार से बताया गया  । उन्होंने बताया की राष्ट्रीय  वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP) भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य मच्छरों या अन्य वाहकों  से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम और नियंत्रण करना है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन  के अंतर्गत संचालित होता है और इसका संचालन NCVBDC द्वारा किया जाता है। वेक्टर जनित रोग वे संक्रामक रोग होते हैं जो मच्छर, मक्खी, टीक, या अन्य कीटों के माध्यम से मनुष्यों तक पहुँचते हैं। भारत में मुख्य वेक्टर जनित रोग हैं मलेरिया, डेंगू ,चिकनगुनिया,लिम्फेटिक फिलेरियासिस, काला-आजार ,जापानी एन्सेफलाइटिस इन सभी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए NVBDCP कार्य करता है। इसका  उद्देश्य मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण
रोगों के संक्रमण और मृत्यु दर को कम करना समय पर पहचान और उपचार उपलब्ध कराना ,समुदाय में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना ,ग्रामीण  आदिवासी और शहरी झुग्गी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना इस कार्यक्रम का दीर्घकालिक लक्ष्य भारत को वेक्टर जनित रोगों से मुक्त बनाना है। इसके प्रमुख  घटक रोग की पहचान और निगरानी, बुखार के मामलों की नियमित जाँच मलेरिया और अन्य रोगों के रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट रोग के मामलों का रिकॉर्ड और रिपोर्टिंग ,उपचार ,समय पर दवा उपलब्ध कराना ,सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपचार मलेरिया के लिए ACT जैसी दवाओं का उपयोग  वेक्टर नियंत्रण का कार्य है ।
मच्छरों की संख्या कम करने के लिए कीटनाशक छिड़काव ,मच्छरदानी, पानी के ठहराव को रोकना ,लार्वा नियंत्रण ,जनजागरूकता ,पोस्टर, पंपलेट, मीडिया अभियान
स्कूलों और समुदाय में जागरूकता
स्वच्छता और पानी के सही प्रबंधन की शिक्षा ,प्रशिक्षण , डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण आशा,आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और एम पी डब्ल्यू को प्रशिक्षण देना । पंचायत और NGOs की भागीदारी समुदाय को मच्छरों के प्रजनन स्थल खत्म करने के लिए प्रेरित करना  NVBDCP की संगठनात्मक संरचना  कई स्तरों पर संचालित होता है  राष्ट्रीय स्तर पर
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
NCVBDC द्वारा नीति निर्माण । राज्य स्तर राज्य कार्यक्रम अधिकारी। जिला स्तर जिला मलेरिया अधिकारी।  प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर सेक्टर अधिकार । अपने शहडोल में 36 सेक्टर बनाए गए है ।  डॉक्टर, स्वास्थ्य कार्यकर्ता और ASHA
यह प्रणाली रोग की पहचान, उपचार और नियंत्रण को ग्रामीण स्तर तक पहुँचाती है।   इन के माध्यम से रोगों के प्रसार को नियंत्रित किया जाता है। आप लोगों के माध्यम से या सामाजिक कार्य के  यह कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि समुदाय में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाना, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिक्षा देना, स्वच्छता अभियान और जल प्रबंधन में लोगों को जोड़ना, NGO और पंचायत के साथ सहयोग ,बीमारी से प्रभावित परिवारों को परामर्श और सहायता देना, भारत में इस कार्यक्रम के कारण  कई राज्यों में मलेरिया के मामलों में कमी काला-आजार नियंत्रण में बड़ी सफलता डेंगू और चिकनगुनिया के नियंत्रण के लिए मजबूत निगरानी प्रणाली कुछ राज्यों में मलेरिया उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति भी देखी गई है।  एस एस शुक्ल जी ने फाइलेरिया के बारे में काफी विस्तार से बताया की   जिले में बढ़ते मच्छरों के कारण फाइलेरिया (हाथीपाँव) बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। फाइलेरिया एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलती है। यह बीमारी मुख्य रूप से शरीर के लसीका तंत्र को प्रभावित करती है, जिसके कारण हाथ, पैर या शरीर के अन्य अंगों में असामान्य सूजन आ जाती है। एम एस डब्ल्यू के छात्र राम बाबू पटेल को जिला मलेरिया अधिकारी द्वारा स्वयं के ग्रामपंचायत क्षेत्र में फाइलेरिया दवाई लेने हेतु टास्क दिया गया है । अन्य छात्रों ने भी अपनी सहमति दिखाई । भ्रमण के दौरान विजिटिंग फैकल्टी डॉ नितिन गर्ग, डॉ सी के  एवं अर्पित दुबे तथा एम एस डब्ल्यू के लघु शोध एवं स्वस्थ क्षेत्र में फील्ड वर्क कर रहे छात्र उपस्थित रहे जिनमें पूर्व एम एस डब्ल्यू  छात्र  आउट सोर्स संचालक भास्कर पांडे एवं रामबाबू पटेल,आंचल शर्मा,अंजलि गौतम,पुष्पलता सिंह,कोमल द्विवेदी,किशन बैगा,सोनू बैगा,आयुष मिश्रा।

Comments

Popular posts from this blog

समाज कार्य में संगीत का महत्व

विश्व तंबाखू दिवस 31/05/25

world 🌎 environment Day survey