पंडित शंभनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय शहडोल संगीत विभाग के अतिथि व्याख्याता डॉ संजीव द्विवेदी जी छात्रों को मानव जीवन में संगीत का अत्यंत गहरा प्रभाव है। यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि भावनाओं को व्यक्त करने, तनाव को कम करने और सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाने का एक सशक्त माध्यम है। समाज कार्य (Social Work) का उद्देश्य व्यक्तियों, समूहों और समुदायों की समस्याओं का समाधान करना, उन्हें प्रेरित करना और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। इस प्रक्रिया में संगीत का प्रयोग एक प्रभावी साधन के रूप में किया जा सकता है, क्योंकि संगीत व्यक्ति के मन और मस्तिष्क पर सीधा प्रभाव डालता है। भावनात्मक अभिव्यक्ति का साधन संगीत व्यक्ति की आंतरिक भावनाओं को अभिव्यक्त करने का एक सहज माध्यम है। समाज कार्य में जब क्लाइंट अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने में कठिनाई महसूस करता है, तब संगीत या गीतों के माध्यम से वह अपनी पीड़ा, खुशी या संघर्ष को आसानी से साझा कर सकता है। यह न केवल क्लाइंट की भावनात्मक शुद्धि (Catharsis) करता है, बल्कि समाज कार्यकर्ता को भी उसकी समस्याओं को गहराई से...
एम.एस .डब्लू चतुर्थ सेमेस्टर की छात्र माधुरी पाली में सर्वे करते हुए। आज दिनांक 31/05/25 को पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय शहडोल प्रोफेसर नीलिमा खरे विभागाध्यक्ष समाज कार्य विभाग जी के निर्देशन में छात्रों द्वारा अपने ग्राम नगर में तंबाखू निषेद दिवस के उपलक्ष्य में गूगल फॉर्म के द्वारा सर्वे किया गया जिसमें कुछ प्रमुख सवाल किए गए थे । सर्वे के दौरान प्राप्त निष्कर्ष प्रथम इन्फोग्राफिक चित्र के द्वारा प्रस्तुत है । एवं प्राप्त सुझाव दूसरे चित्र में दिखाया गया है । सर्वे समाज कार्य विभाग के विजिटिंग फैकल्टी नितिन गर्ग द्वारा निर्मित किया तथा सभी छात्रों से समन्वय का कार्य विजिटिंग फैकल्टी डॉ चंद्रकांत एवं अर्पित दुबे द्वारा क्रियान्वित किया गया सर्वे में । निम्न चार्ट जो तंबाखू के उपयोग से जुड़े प्रश्नों के अंतर्गत किया गया है ।
🌱 विश्व पर्यावरण दिवस 2025: जनभागीदारी एवं जागरूकता पर आधारित सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तावना: हर वर्ष 5 जून को “विश्व पर्यावरण दिवस” मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता लाना है। वर्ष 2025 का विषय रहा — “प्लास्टिक प्रदूषण समाप्त करें”। इस अवसर पर एक ऑनलाइन सर्वेक्षण आयोजित किया गया जिसमें विभिन्न विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों से जुड़े छात्रों व नागरिकों ने भाग लिया। --- 1. प्रतिभागियों की जानकारी: सर्वेक्षण में मुख्य रूप से शहडोल जिले के विभिन्न ग्रामों, वार्डों, और नगरों से प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में विद्यालय के छात्र, विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, शिक्षक और कोचिंग संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे। यह सहभागिता दर्शाती है कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर स्थानीय स्तर पर उत्साह एवं रुचि बनी हुई है। --- 2. व्यक्तिगत योगदान और अनुभव: प्रश्न किया गया कि “क्या आपने स्वेच्छा से कभी पर्यावरण संरक्षण के लिए कोई कार्य किया है?” अधिकांश प्रतिभागियों ने सकारात्मक उत्तर दिए। कई उत्तरों में उल्लेख किया गया कि उन्होंने सार्व...
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