नर्मदा
आज दिनांक 05/06/2024 विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य पर पंडित .एस .एन .शुक्ला . वि. वि .शहडोल । ऑनलाइन माध्यम में संकाय अध्यक्ष प्रो तारामणि श्रीवास्तव जी की अध्यक्षता में एवम प्रोफेसर नीलिमा खरे विभागाध्यक्ष जी के मार्गदर्शन में तथा सहायक प्राध्यापक अतिथि विद्वान नितिन गर्ग एवम डॉ अशोक डेहरीया जी के समन्वय से मध्य भारत की जीवन रेखा । नर्मदा पुराण के अनुसार विश्व की प्रथम नदियों में से एक नर्मदा को किस प्रकार समाज कार्य के विद्यार्थी , लोगो को जागरूक कर सकते है जिससे की विश्व का पोषण हो सके ऐसे विषय पर विषय विशेषज्ञ डॉ. रितुराज शुक्ल जो पिछले 10 वर्षों से हाइड्रोलॉजी, जलवायु परिवर्तन और जल गुणवत्ता मॉडलिंग में अनुसंधान को समर्पित किया है। उन्होंने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर से बी.टेक और एम.टेक की डिग्री प्राप्त की और आईआईटी रुड़की से पीएच.डी. की, जहाँ उन्हें डीएसटी, भारत सरकार द्वारा इंस्पायर अवार्ड फेलोशिप से सम्मानित किया गया। उन्होंने राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की में काम किया, जहाँ विभिन्न वैज्ञानिक अनुसंधान परियोजनाओं का संचालन किया। वर्तमान में, डॉ. शुक्ला ,यूनिवर्सिटी ऑफ गेल्फ, ओंटारियो, कनाडा में एक शोध वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं, जहाँ वे जल मात्रा और गुणवत्ता मॉडलिंग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान, उन्होंने 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सहकर्मी-समीक्षित शोध लेख प्रकाशित किए, 4 पुस्तक लिखे और मूलतः शहडोल के है । उन्होंने छात्रों के सामने नर्मदा नदी बेसिन के जल संरक्षण के महत्वपूर्ण तरीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रभावी सिंचाई तकनीकों जैसे ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम, जल पुनर्भरण संरचनाओं जैसे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और तालाबों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने नदियों और जलाशयों में प्रदूषण कम करने के उपाय, वृक्षारोपण और वन संरक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी चर्चा की। सामुदायिक भागीदारी और जन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। मास्टर ऑफ सोशल वर्क के छात्रों ने जल संरक्षण के महत्व को समझा । विद्यार्थियों को भूखंड के निर्माण जल का निर्माण ,नदियों का निर्माण उसमे प्रमुख्तः नर्मदा का महत्व नर्मदा उद्गम से लेकर समुद्र में समाहित होने तक की स्लाइड प्रेजेंटेशन के माध्यम से छात्रों को समझाया । जल स्तिथि और खनिज संसाधन कोयला,बॉक्साइट, पेड़,पौधे ,औषधीय वृक्ष,का लगातार दोहन हो रहा है जिसका सीधा प्रभाव भू जल स्तर पर होता है ।उन्होंने बताया किस प्रकार कोयला एक वाटर प्यूरीफायर और कंजरवेटर कार्य करता है । कोयला तो कुछ ही दिनों में समाप्त हो जायेगा मगर कृषि अनंत काल तक रहती है । और जो हर प्रकार से पोषण करती है । डॉ शुक्ला जी ने समाज कार्य एवम समाज से संबंधित विषय जो आनलाइन मोड से जुड़े सभी नदियों के प्रति संवेदनशील रहने की आवश्यकता है ।आग्रह किया की शहडोल की भूमि बहुत ढाल पर होने से जल को केवल तालाबों के माध्यम से बचाया जा सकता अन्यथा यह बिल्कुल संभव है बारिश के दिनो के अलावा बाकी दिनों में जल संकट से जूझना पड़ सकता है । और शहर बहुत तेजी से सूख सकता है । नर्मदा भले ही यहां से न गुजरती हो मगर नर्मदा जी को संरक्षित करना केवल शहडोल संभाग लोगो और आप समाज कार्य विषय के विद्यार्थियों द्वारा किया जा सकता है । ऐसे कई संवेदन शील विषय को विस्तार से समझाने का प्रयास किया गया और छात्रों ने भी काफी लगन से उन बातों को नोट किया तथा सुना । इस दौरान समाज शास्त्र की अतिथि विद्वान डॉ सिद्धीश्री एवम ऐसे विद्यार्थी जो जल संरक्षण से संबंधित लघु- शोध या क्षेत्रीय कार्य कर रहे हैं वे उपस्थित रहे ।
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