किशोर न्याय बोर्ड

आज दिनांक 21/09/2024 विभागाअध्यक्ष समाज कार्य विभाग प्रोफेसर नीलिमा खरे जी के निर्देशन तथा विजिटिंग फैकल्टी नितिन गर्ग एवं अर्पित दुबे के समन्वय से किशोर न्याय बोर्ड शहडोल का क्षेत्रीय भ्रमण किया गया आम वहां की अधीक्षक श्रीमती संगीता भगत जी के द्वारा एम.एस.डब्ल्यू के विद्यार्थियों को जानकारी दी गई की यहां दो कार्यालय संचालित है किशोर न्याय बोर्ड तथा बाल संप्रक्षण गृह संचालित है । उन्होंने किशोर न्याय बोर्ड के बारे में बताया की यह भारत सरकार द्वारा संचालित है यहां 18 साल से कम उम्र के बालक(लड़की और लड़के) से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाती है जिन्होंने कानून का उल्लंघन किया है किसी अपराध में संलिप्त पाया गया हो ।
विद्यार्थियों के प्रश्नों को भी अधीक्षिका महोदया द्वारा विस्तार से पोषित किया गया की 
किशोर न्याय बोर्ड के उद्देश्य के अंतर्गत न्यायिक सुनवाई, सुधार ,पुनर्वास, मानवाधिकारों की सुरक्षा, न्यायिक प्रक्रिया , किशोर अपराध के कार्यो की पहचान आदि विषय आते है ।
बच्चों के अपराध के कारणों पर भी चर्चा हुई जिसमें पारिवारिक समस्या जिसके अंतर्गत परिवार में तनाव, घरेलू हिंसा, माता-पिता के बीच झगड़ा, तलाक या परिवार में तनाव पूर्ण माहौल बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है जिससे उनमें अपराधिक प्रवृत्ति बढ़ती है।
भावनात्मक उपेक्षा एवं आर्थिक समस्या। विजिटिंग फैकल्टी नितिन गर्ग जी द्वारा सामाजिक प्रभाव को इंगित किया गया जिनके कारण बाल अपराध में वृद्धि देखी जा रही है जिसके अंतर्गत असामाजिक मित्र मंडली, सामाजिक असमानता, शैक्षणिक असफलता ,शिक्षा की कमी, स्कूल ड्रॉप आउट
 एवं मनोवैज्ञानिक कारण भी होते हैं जिसमें भावनात्मक और मानसिक विकार जैसे अवसाद, चिंता, क्रोध से जुड़े विकार, आक्रामकता यह कुछ ऐसे तत्व हैं जिनके कारण भी बाल अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। विजिटिंग फैकल्टी अर्पित दुबे जी के द्वारा भी दो बिंदुओं को विशेष कारण माना मीडिया ,इंटरनेट का प्रभाव जिसके अंतर्गत टीवी धारावाहिक, फिल्में, कुछ खेल, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग , नशे एवं मादक पदार्थों का सेवन जिसमें नशे की लत के संपर्क में आने से बालक का शारीरिक संतुलन बिगड़ जाता है और अपराध, चोरी, तस्करी , मादक पदार्थों का आसानी से उपलब्ध होना यह भी बालको को अपराध के प्रति प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एमएसडब्ल्यू के तृतीय सेमेस्टर के छात्रों शिवम रजक , रेशमी नामदेव एवं दिव्या तिवारी ने बालक अपराध के करण के अंतर्गत तीन और बिंदुओं को महत्वपूर्ण माना जिसमें आत्मसम्मान की कमी, सामाजिक अस्वीकार्यता, स्वयं को साबित करने की इच्छा , अपराधिक संस्कृति का प्रभाव कुछ समाजों में अपराध सामान्य माना जाता है जो बच्चों को अपराध करने के लिए प्रेरित करता है ऐसी स्थिति में बच्चों को अपराधी बनना अपनी पहचान या संस्कृति का हिस्सा मान लेते हैं और अपराध जैसे क्षेत्र में आगे बढ़ जाते हैं।
क्षेत्र भ्रमण के दौरान एमएसडब्ल्यू के प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थी पूजा सिंह, वंदना नापित, उमा राणा ,टीकबती बैगा, भारती सिंह, आयुष मिश्रा ,सोनू बैगा एवं देववती आदि विद्यार्थियों से अधीक्षक मैडम ने बाल अपराध को कैसे शून्य में लाया जा सकता हैं । जवाब में पुष्प लता एम.एस.डब्ल्यू प्रथम सेमेस्टर की छात्रा ने चाणक्य के वाक्य को बताते हुए कहा की एम.एस.डब्ल्यू पाठ्यक्रम मानव वृद्धि एवं विकास के अंतर्गत हमे बताया गया की वैसे बच्चे में गुण का विकाश गर्भावस्था से ही शुरू हो जाता है । लेकिन चाणक्य नीति के वाक्य "5 वर्ष तक बालक को प्रेम, अगले 10 वर्ष तक कड़ा अनुशासन एवं 15 वर्ष के बाद मित्र बना लेना चाहिए " ऐसा बालक समाज के लिएं हानिकारक नही हो सकता एवम इससे बालक अपराध को कम किया जा सकता है।

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