शिवालय शिशु ग्रह
आज दिनांक 19/10/24 पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय। विभागाध्यक्ष समाज कार्य विभाग प्रोफेसर नीलिमा खरे जी के मार्गदर्शन एवं विजिटिंग फैकल्टी नितिन गर्ग,अर्पित दुबे ,चंद्रकांत जी के समन्वय से शिवालय शिशुगृह का शैक्षणिक भ्रमण किया गया। अधीक्षक श्री ब्रजेश कुमार दुबे जी द्वारा शिशुआलय के संचालन की संपूर्ण जानकारी मास्टर ऑफ सोशल वर्क के छात्रों को प्रदान की गई जिसके अंतर्गत सतगुरु मिशन संस्थान के बारे में उन्होंने बताया कि स्कूल संचालित है । और बहुत समय से समाज कार्य के क्षेत्र में संस्थान बहुत से कार्य कर रहा है ,चाइल्डलाइन 1098 के बारे में भी छात्रों को बताया गया कि एक राष्ट्रीय आपातकालीन हेल्पलाइन है, जो बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए काम करती है। यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहती है और इसका उद्देश्य संकट में फंसे बच्चों को तुरंत मदद और समर्थन प्रदान करना है। चाइल्डलाइन 1098 के माध्यम से बच्चे शारीरिक शोषण, बाल मजदूरी, बाल विवाह, घरेलू हिंसा या अन्य किसी भी प्रकार की समस्या से जूझ रहे हों, तो वे सीधे संपर्क कर सकते हैं और उन्हें तत्काल सहायता मिलती है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत में सभी बच्चों को एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य प्रदान करना होता है जिसके लिए एक टीम एवं कुछ वोलेंटियर तथा समाज के जागरूक लोग इसमें सहभागिता देते है । दुबे जी द्वारा छात्रों के प्रश्न पर CARA के बारे में बताया गया कि केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) भारत सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है, जो देश में दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया को विनियमित और प्रोत्साहित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों के दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी और नैतिक हो। CARA राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दत्तक ग्रहण के मामलों की निगरानी करती है और यह सुनिश्चित करती है कि बच्चों को एक सुरक्षित और स्थिर परिवार मिले। इसके साथ ही, यह प्राधिकरण दत्तक ग्रहण से संबंधित नियमों और दिशा-निर्देशों को लागू करने का कार्य भी करता है। छात्रों के एक प्रश्न की शिशु ग्रह में महिला एवं बाल विकास का क्या योगदान है इसके जवाब में चाइल्डलाइन में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह मंत्रालय चाइल्डलाइन को वित्तीय और प्रशासनिक सहयोग प्रदान करता है, ताकि संकट में फंसे बच्चों को तत्काल सुरक्षा और सहायता मिल सके। मंत्रालय चाइल्डलाइन के संचालन की निगरानी करता है और उसे देश भर में फैलाने के लिए आवश्यक संसाधन और नीतिगत समर्थन देता है। इसके अलावा, बाल अधिकारों की रक्षा, बाल शोषण की रोकथाम, और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए चाइल्डलाइन के माध्यम से अन्य सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के साथ समन्वय करता है। अधीक्षक द्वारा शिवालय का MSW के विद्यार्थियों को नियंत्रित भ्रमण कराया गया एवं केयरटेकर और शिशुओं से दृष्टव्य तथा उनके पालन पोषण की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई । तथा ब्रजेश जी के द्वारा कुछ शिशुओं से संबंधित स्मृतियां भी साझा की गई जैसे यह बताया कि अब तक 61 शिशुओं को दत्तक किया जा चुका है । जिसमें 54 भारत में तथा 7 अन्य देशों में प्रमुखतः माल्टा जहां ट्रिपलेट्स एक दत्तक हुए ,इटली,फिनलैंड आदि प्रमुख है । HSR के बारे में बताया गया जो केवल MSW जैसे विषय के विशेषज्ञ द्वारा ही किया जाता है । दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में होम स्टडी रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है, जो दत्तक माता-पिता की पृष्ठभूमि, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक माहौल, और बच्चे की देखभाल की क्षमता का मूल्यांकन करती है। इस रिपोर्ट को एक अधिकृत सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा तैयार किया जाता है, जिसमें दत्तक ग्रहण के लिए परिवार की उपयुक्तता का आकलन किया जाता है। रिपोर्ट में परिवार के स्वास्थ्य, भावनात्मक स्थिरता, और दत्तक ग्रहण के प्रति उनके दृष्टिकोण को भी शामिल किया जाता है। होम स्टडी रिपोर्ट यह सुनिश्चित करती है कि बच्चे को एक सुरक्षित, स्थिर और प्यारभरा वातावरण मिले। शिशुओं से मिलने के बाद विद्यार्थियों ने दीपावली हेतु अपने स्वयं के पॉकेट मनी से कुछ राशि एकत्रित कर दान पेटी में समर्पित किया । उस दौरान प्रथम सेमेस्टर से पुष्पलता ,आंचल, भारती,किशन,वंदना,अंकिता तथा तृतीय सेमेस्टर से दिव्या,रेशमी, संदीप,आंचल गुप्ता,सुमन,निधि, शिवानी आदि छात्रों उपस्थित रहे ।
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