आश्रम प्रबंधन एवं संचालन व्यवस्था

आज दिनांक 21.11.2025 पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय शहडोल मध्य प्रदेश। विभाग अध्यक्ष समाज कार्य एवं समाजशास्त्र विभाग प्रोफेसर नीलिमा खरे जी के मार्गदर्शन में । भारतीय परिपेक्ष में आश्रम व्यवस्था को समझने हेतु शहडोल कल्याणपुर स्थित रामसखा आश्रम का भ्रमण किया गया और वहां जाकर के आश्रम के प्रबंधन एवं व्यवस्था को समझने का प्रयास किया गया। छात्रों को विजिटिंग फैकल्टी नितिन गर्ग जी द्वारा बताया गया की भारतीय संस्कृति में आश्रम व्यवस्था एक ऐसी सामाजिक तथा आध्यात्मिक संस्था है, जिसका उद्देश्य मानव जीवन के चरित्र निर्माण, ज्ञानार्जन, आत्मानुशासन, सामाजिक योगदान और मोक्ष की दिशा में मार्गदर्शन करना है। प्राचीन भारत में आश्रम न केवल शिक्षा के केंद्र थे बल्कि सामाजिक सेवा, धार्मिक अनुशासन, कृषि, चिकित्सा, विद्या, पर्यावरण संरक्षण एवं नैतिक मूल्य निर्माण के प्रमुख स्थल भी थे। आधुनिक संदर्भ में भी यह व्यवस्था सामाजिक कार्य, वृद्धजन सेवा, नशा मुक्ति, महिलाओं एवं बच्चों की देखभाल, शिक्षा, योग, ध्यान तथा ग्रामीण विकास जैसी गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए आश्रमों के संचालन एवं प्रबंधन का सुव्यवस्थित अध्ययन आवश्यक है। विजिटिंग फैकल्टी डॉ चंद्रकांत त्रिपाठी जी द्वारा आश्रम व्यवस्था की अवधारणा बताई गई जैसे आश्रम में 
भारतीय परंपरा में आश्रम एक ऐसा स्थान जहाँ अनुशासन, अध्ययन, साधना, सेवा और स्वावलंबन का वातावरण हो। चार प्रमुख आश्रम ब्रह्मचर्य आश्रम – शिक्षा व व्यक्तित्व निर्माण का आधार। गृहस्थ आश्रम सामाजिक, आर्थिक व पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन।वानप्रस्थ आश्रम समाज के लिए मार्गदर्शन, सेवा एवं त्याग। संन्यास आश्रम – आध्यात्मिक उन्नति एवं मोक्ष की साधना ऐसी व्यवस्था प्राचीन काल में देखने को मिलती मगर आजकल आश्रम विभिन्न रूपों में कार्य करते हैंगुरुकुल, सेवा आश्रम, वृद्धाश्रम, नशा मुक्ति केंद्र, योग आश्रम, आध्यात्मिक आश्रम आदि। विजिटिंग फैकल्टी अर्पित दुबे जी द्वारा आश्रम के उद्देश्य से अवगत कराया गया शिक्षा व संस्कार प्रदान करना नैतिक शिक्षा, योग, ध्यान, अध्यात्म सामाजिक सेवा , निर्धनों, वृद्धों, अनाथों, असहायों की सहायता। आत्मनिर्भरता स्वावलंबन पर आधारित जीवन शैली। समुदाय विकास , स्वास्थ्य, जल संरक्षण, वृक्षारोपण आदि। मानसिक शांति एवं उपचार ,चरित्र निर्माण , अनुशासन, सत्य, अहिंसा, सहिष्णुता, सेवा भावना। उस दौरान वह व्यवस्था को देख रहे रामरतन जी छात्रों आश्रम से संबंधित अन्य जानकारी भी प्रदान की विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर के छात्र उपस्थित रहे जिनमें आयुष मिश्रा, आंचल शर्मा, अंजली गौतम, किशन बैगा ,अंकित गुप्ता ,पुष्पलता सिंह, पूजा सिंह, अनामिका शर्मा ,उमा प्रजापति, विद्या सिंह एवं शाहीन आदि उपस्थित थे।

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