child and human trafficking
शहडोल, 14 अक्टूबर 2026 — पंडित शंभूनाथ विश्वविद्यालय शहडोल के समाज कार्य विभाग (MSW) के विद्यार्थियों ने डीन प्रोफेसर नीलिमा खरे के मार्गदर्शन में मानव तस्करी एवं बाल तस्करी के प्रति जन-जागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को इस गंभीर सामाजिक समस्या के प्रति सजग बनाना तथा इसकी रोकथाम में आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना रहा।
कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने सर्वप्रथम शहडोल कोतवाली का भ्रमण किया और वहाँ से मानव तस्करी एवं बाल तस्करी से संबंधित विषय की विस्तृत जानकारी एकत्रित की। इसके पश्चात् MSW के विभिन्न समूहों ने आम नागरिकों, अभिभावकों एवं बच्चों के बीच जाकर जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए।
कार्यक्रम का समन्वय विजिटिंग फैकल्टी श्री नितिन गर्ग एवं श्री अर्पित दुबे द्वारा किया गया।
जागरूकता के प्रमुख बिंदु
विद्यार्थियों ने जनसमुदाय को बताया कि मानव तस्करी केवल बच्चों को दूसरे राज्य या देश ले जाना नहीं है, बल्कि शोषण की परिस्थितियों में यह अपने ही जिले या क्षेत्र में भी हो सकती है। बच्चों के मामले में उनकी सहमति शोषण को वैध नहीं बनाती।
अभिभावकों को सचेत किया गया कि वे अभी वर्तमान में त्यौहार का मौसम चल रहा है । बच्चियां / कन्या खाने अपने आस पास घरों में जाती है तो माता पिता अभिभावक अकेला बिलकुल भी न छोड़े क्योंकि अन्य दिनों की अपेक्षा इन दिनों अंजान लोगों की भीड़ बढ़ जाती है । ऐसे तस्कर सक्रिय हो जाते है । अतः अपने बच्चों और दूसरे के बच्चों को पर सुरक्षात्मक दृष्टि रखनी एवं सतर्क रहना चाहिए । अनजान व्यक्तियों के रोजगार एवं शिक्षा के प्रलोभन से सावधान रहें तथा बिना सत्यापन के बच्चे को किसी के साथ न भेजें। बच्चों के आने-जाने की जानकारी रखें, अचानक स्कूल छोड़ने या लापता होने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें। बच्चों को सुरक्षित एवं असुरक्षित व्यवहार की पहचान, ऑनलाइन सुरक्षा तथा अनुचित स्पर्श के प्रति 'नहीं' कहने का साहस सिखाया गया।
चाइल्ड हेल्पलाइन एवं आपातकालीन सेवाओं की जानकारी
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को आपातकालीन सहायता के लिए 112, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, स्थानीय पुलिस, बाल कल्याण समिति (CWC) एवं जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) के संपर्क विवरण उपलब्ध कराए गए। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि संदेह होने पर स्वयं जोखिम में पड़कर संदिग्ध व्यक्ति का सामना न करें तथा बच्चे की पहचान एवं तस्वीर सोशल मीडिया पर सार्वजनिक न करें।
विशेष सुझाव
शहडोल संभाग के ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष सुझाव दिया गया कि MSW विद्यार्थी ग्राम पंचायतों, विद्यालयों, आंगनवाड़ी केंद्रों एवं आदिवासी बस्तियों में स्थानीय भाषा में छोटे जागरूकता सत्र आयोजित करें तथा प्रत्येक सत्र में अभिभावकों को सत्यापन, नियमित संपर्क, शिक्षा एवं समय पर शिकायत करने के महत्व की जानकारी दें।
कार्यक्रम में सहभागी विद्यार्थी
जागरूकता कार्यक्रम में एम एस डब्ल्यू के छात्र-छात्राओं में पिंकी कुशवाहा, धनेश्वरी प्रजापति, श्वेता तिवारी, विनय मिश्रा, विद्या सिंह, अनामिका शर्मा,खुशबू मिश्रा,तेरसिया, तेज़वती सिंह, स्नेहा तिवारी, आंचल मिश्रा, विधि गर्ग, कमलेश्वरी, अंजेश्वरी, कीर्ति, हेमलता, उमा, जयदीप, दुआसे कृष्ण पाल सिंह, हेमलता केवट, प्रीति, प्रिय केवट एवं हिमांशी शुक्ला आदि ने सक्रिय सहभागिता की।
संदेश
"सतर्क परिवार, सुरक्षित बचपन" — रोजगार, शिक्षा या बेहतर भविष्य का झूठा लालच बच्चों को शोषण की ओर धकेल सकता है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना दें, बच्चों की बात सुनें और उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दें। बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
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